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सोमवार, मई 27, 2013

आओ, मुझको प्यार कर दो!


हिल तो रही थीं दीवारें,
पर, पीठ लगाए बैठा था,
अब ज़मीन भी घूम रही है,
आओ- मुझको प्यार कर दो.
बार-बार दिल में आता है,
उछल के छू लूं नील गगन,
डरता हूँ, तुम रूठ न जाओ,
उठो, मुझे लाचार कर दो.
जी करता है, राग मचा दूं,
इस दुनिया को आग लगा दूं,
घमासान हो- इसके पहले,
बढ़ो- मुझे बेकार कर दो.
कितना अकेला, अधूरा हूँ मै,
तुम बिन कहाँ से पूरा हूँ मै,
क्या जानो कि क्या हो जी तुम?
चलो, ये घर- संसार कर दो.
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गुरुवार, मार्च 21, 2013

यादें बचपन की.


कभी हँसाएं, कभी रुलाएं, क्या-क्या रंग दिखाएं,
यादें बचपन की, ये यादें बचपन की.

सुबह सवेरे घर से निकलते, घर का रुख ना करते,
जब तक मम्मी ढूंढ ना लेती, कहाँ-कहाँ हम फिरते,
तीखी मीठी डांटे सुनते, मुँह में हँसी दबाए.
...यादें बचपन की.
जब तक पापा घोड़ा बनते, दूध ना तब तक पीते,
गुस्सा आता तो पापा की, मूंछ पकड़ के लटकते,
आती नींद तभी जब पापा, गोद में रख के सुलाएं.
... यादें बचपन की.
चोटी मेरी खींच के भैय्या, खूब मरम्मत करते,
फिर टॉफी दे कान पकड़ते, सौ-सौ नाक रगड़ते,
रानी बन हम खाते वही, जो अपने मन को भाए.
...यादें बचपन की.

साईकल पर जब बस्ता रखकर, हम स्कूल से चलते,
तुम उलझाते साईकल मेरी, सड़क पे दोनों गिरते,
बात न करते तुमसे हफ्तों, रहते नाक फुलाए.
... यादें बचपन की.

शनिवार, मार्च 24, 2012

हमरी कसम है मितवा

हाय- हमरी कसम है मितवा, सन्देस ना पठईहों,
बिछुआ की कसम हमको, तो से मिलन ना अईहों. हमरी..

कल थीं झुकी जो अँखियाँ, चोली भी मसकी कखियाँ,
सब बूझ गईं सखियाँ- बगिया की कहि न जईहों. हमरी...

अब पोतूं नहीं मैं कजरा- जूडा न बांधूं गजरा,
मेंहदी रचूंगी न ज़रा- नथ नाक ना लगईहों. हमरी...

जो तोसे मिलन ना आई- ना समझो जी पराई,
बस, बाली उमर दुहाई- तोहरी बलईयाँ लईहों. हमरी...

है बात बात दूई बरस की, मोह पे समझ- तरस की,
नईहर से मै जो टसकी, कुछ ना कसर उठईहों. हमरी...
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