खरिहान
कविताएं- केशव 'कहिन' और ग़ज़लें- के 'नज़र' के नाम से
घर जाऊं कि न जाऊं?
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बुधवार, अप्रैल 24, 2013
घर जाऊं कि न जाऊं?
कुत्ते को पाला,
मैंने,
बिल्ली को पाली,
बिल्ली के कटोरे से,
खाने लगा कुत्ता,
बिल्ली गुर्राने लगी,
कुत्ते से अच्छा,
सोचा- यही होना था,
आगे चली ये दुनिया,
कल कुत्ता अपने कटोरे पर,
बिल्ली वापस म्याऊँ,
बहुत डर लगता है,
घर जाऊं,
कि न जाऊं?
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