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शुक्रवार, अप्रैल 05, 2013

तालाब का पानी


मैंने देखा भर है,
छुआ नहीं,
शांत और ठहरे हुए,
तालाब के पानी को,
चुप-चाप और खामोश,


करते हुए इन्तजार,
किसी कंकड का,
जो रख दे हिला-डुला कर,
मचा  दे उथल-पुथल,
और बना जाए सार्थक,
होना तालाब का पानी,
जो ठहरा हुआ नहीं.
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शुक्रवार, जनवरी 18, 2013

बरसता नहीं पानी!


जब वो नहीं आते थे,
तो पानी बरसता था.
इक आग सी लगती थी,
बरसता क्यों है पानी!
आज वो आए हैं,
इक आग सी लगी है,
अब आग भी लगती है,
तो बरसता नहीं पानी!
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