खरिहान
कविताएं- केशव 'कहिन' और ग़ज़लें- के 'नज़र' के नाम से
तालाब
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तालाब
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शुक्रवार, अप्रैल 05, 2013
तालाब का पानी
मैंने देखा भर है,
छुआ नहीं,
शांत और ठहरे हुए,
तालाब के पानी को,
चुप-चाप और खामोश,
करते हुए इन्तजार,
किसी कंकड का,
जो रख दे हिला-डुला कर,
मचा दे उथल-पुथल,
और बना जाए सार्थक,
होना तालाब का पानी,
जो ठहरा हुआ नहीं.
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