शनिवार, मार्च 16, 2013

यही रहते थे आदमी कभी!


अब नहीं होती मौत,
शहर में,
किसी गीदड़ की,
डर नहीं लगता उसे,
आने से,
और भभकियां देने तक से,
उन सब को-
जो शहर में पाए जाते हैं, 
रहते हुए-
किसी से चिपके,
और कहीं दुबके.
कहा और सुना जाता है- 
यहीं रहते थे,
आदमी कभी!
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